प्रवासी मजदूर:कोरोना से संक्रमितों की संख्या में इजाफा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को कोरोना से बचाने के लिए लॉकडाउन लागू किया था, शुरू के कुछ दिनों में तो लोगों ने इसका पालन किया मगर अप्रैल माह बीत जाने के बाद मजदूरों का धैर्य जवाब दे गया और फिर वो अपना इक्ट्ठा किया हुआ सारा सामान लेकर अपने गांव की ओर निकल पड़े।

3 मई के बाद से देश के तमाम राज्यों से मजदूर पैदल, साइकिल, रिक्शा, ट्रक, ट्रैक्टर और ट्राला तक में बैठकर अपने गांव पहुंच रहे हैं। जिनको ये सब नहीं मिला वो साइकिल और रिक्शे से ही अपने गांव के लिए निकल पड़े। सरकार ने जब ये देखा कि इन मजदूरों को रोक पाना मुश्किल हो रहा है उसके बाद ही श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने की नीति बनाई गई और इन मजदूरों को उनके गांव छोड़ना तय किया गया।

अब आलम ये हो गया है कि जब से ये प्रवासी मजदूर अपने गांवों को पहुंच रहे हैं उसके बाद से कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या में भी इजाफा होता जा रहा है। इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। देश के कुछ प्रमुख राज्यों में तो अचानक से मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।

राज्यों में बढ़ते जा रहे मरीज

उत्तर प्रदेश के कई जिले जहां अब तक कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या इकाई में थी, वहां अब एक दिन में ही दर्जनों लोग पॉजिटिव मिल रहे हैं। वहीं बिहार में संक्रमित लोगों में करीब 46 फीसद लोग प्रवासी बताए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या पांच हजार को पार कर गई है। राज्य सरकार के मुताबिक, श्रमिक स्पेशल ट्रेनों और बसों से अब तक बीस लाख लोग अपने घरों को वापस लाए जा चुके हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दूसरे राज्यों से आए अब तक 1041 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं जोकि राज्य में कुल कोरोना संक्रमित मरीजों का करीब एक चौथाई है। यह स्थिति तब है जबकि बड़ी संख्या में अभी लोग लौट रहे हैं और जो लौटे भी हैं उनमें से ज्यादातर अभी क्वारंटीन में हैं और कोविड टेस्ट बहुत कम संख्या में हुए हैं।

छोटे शहरों में अब बढ़ रहा संक्रमण

यहां सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि तमाम छोटे शहरों में जहां अब तक संक्रमण की रफ्तार बेहद कम थी, वहां हर दिन ज्यादा संख्या में लोग पॉजिटिव मिल रहे हैं। यूपी के एक जिले बस्ती में पिछले दिनों एक ही दिन में पचास लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके अलावा आजमगढ़, जौनपुर, संभल, बहराइच, बाराबंकी जैसे जिलों में भी संक्रमित लोगों की संख्या में खासी बढ़ोत्तरी हुई है।

राजधानी लखनऊ से लगे बाराबंकी जिले में संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बाराबंकी के जिलाधिकारी आदर्श सिंह ने कुछ दिन पहले बताया था कि 15 और 16 मई तक 245 लोगों के नमूने लिए गए थे जिनमें 95 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनमें करीब पचास लोग दूसरे राज्यों से आए हैं।

एक बात ये भी बताई जा रही है श्रमिक ट्रेनों, सरकारी बसों और अन्य वैध साधनों से आने वालों की संख्या से कहीं ज्यादा ऐसे लोग हैं जो विभिन्न तरीकों से अपने आप ही अन्य राज्यों से चले आए। इनमें से कुछ तो क्वारंटीन सेंटरों में गए लेकिन बहुत से लोग ऐसे हैं जो सीधे तौर पर अपने घरों और गांवों में पहुंच गए।

जाहिर है, इनका न तो कहीं परीक्षण हुआ और न ही कहीं इन्हें अलग रखा गया, यदि ऐसे लोगों में संक्रमण हुआ तो निश्चित तौर पर यह संक्रमण अन्य लोगों तक भी आसानी से पहुंच जाएगा। आने वाले ज्यादातर प्रवासी मुंबई, दिल्ली और गुजरात से हैं जहां संक्रमण की स्थिति देश में सबसे खराब है।

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मजदूरों के आने का सिलसिला जारी

यूपी और बिहार दोनों ही बड़े राज्य हैं, यहां से निकलकर लाखों की संख्या में मजदूर दूसरी जगहों पर काम करने के लिए जाते हैं, अभी इन मजदूरों के आने का सिलसिला जारी है। बिहार में 8 राज्यों से अगले एक सप्ताह के दौरान करीब पांच सौ ट्रेनों के कार्यक्रम बनाए गए हैं जिनसे 8 लाख मजदूरों के आने की संभावना है।

राज्य सरकार के नोडल अधिकारी के मुताबिक रेलवे स्टेशनों से ही बसों के माध्यम से विभिन्न जिलों के मुख्यालयों तक मजदूरों को भेजा जा रहा है, जहां से उन्हें अलग-अलग स्तर पर बने क्वारंटीन सेंटरों में भेजा जाएगा।

बिहार में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 1600 को पार कर गई है। पिछले चार दिनों में बिहार में 400 से ज्यादा पॉजिटिव मामले सामने आए। स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार के मुताबिक, अन्य राज्यों से विशेष ट्रेनों से आए प्रवासी मजदूरों में से 8337 नमूनों की जांच की गई है, जिसमें 651 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं।

प्रवासी मजदूरों को क्वारंटीन करने में न सिर्फ शासन-प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है बल्कि क्वारंटीन सेंटरों की स्थिति भी इस तरह की है कि वहां से लोग भाग रहे हैं। यूपी और बिहार के तमाम जगहों से आए दिन क्वारंटीन सेंटरों से लोगों के भागने या फिर अव्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें करने की खबरें आती रहती हैं। मजदूरों की ये भी शिकायत रही कि क्वारंटीन सेंटरों में उनके हिसाब से सुविधाएं मुहैया नहीं है। इसके बाद इन सेंटरों को लेकर भी राजनीति शुरू हो गई।

कई सेंटरों से मजदूर निकलकर सड़क पर आ गए। अब सड़कों पर उमड़ी भीड़ देखकर राजनीति की जाने लगी। एक बात और हुई कि जिस सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए सरकार ने कदम उठाया था वो इन मजदूरों की वजह से तार-तार हो गया, चाहे दिल्ली हो, मुंबई, कोलकाता या कोई और शहर, जहां से भी मजदूर सड़क पर निकले वहां सोशल डिस्टेंसिंग खत्म हो गई।

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