आजादी के बाद भी शहीद को सरकार ने नजरअंदाज किया- रामविलास प्रजापति

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***1942 की अगस्त क्रांति पर विशेष***

देवरिया – शहीद रामचंद्र विद्यार्थी 13 वर्ष की उम्र में शहीद हुए थे रामचंद्र विद्यार्थी का जन्म 1 अप्रैल 1929 को उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद के नौतन हथियागढ़ गांव में एक गरीब प्रजापति परिवार के घर हुआ था इनके जन्म के आठवें दिन भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त केंद्रीय असेंबली में बम फेंका था उनके पिता का नाम बाबूलाल और माता का नाम मोती रानी देवी था बचपन में इनके दादा जी वीरों की कहानियां सुनाया करते थे जिससे वे प्रभावित होकर उनके दिल और दिमाग में आजादी पाने के लिए देशभक्ति का जज्बा अंकुरित हुआ उस समय 8 अगस्त सन 1942 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन मुंबई में चल रहा था महात्मा गांधी ने देश की जनता में उत्साह देखते हुए नारा दिया अंग्रेजों भारत छोड़ो इसके पहले कांग्रेस ने यह नारा नहीं दिया था अधिवेशन का रुख देखते हुए ब्रिटिश हुकूमत ने अधिवेशन स्थल पर डेरा डाल दिया था चप्पे-चप्पे पर अधिकारी सीआईडी और पुलिस के जवान लगे थे अंग्रेजों भारत छोड़ो का प्रस्ताव पास हुआ तो चारों तरफ पुलिस के जवानों ने सक्रियता दिखाई रातो रात कांग्रेस के सभी बड़े नेता गिरफ्तार कर लिए गए गांधी नेहरू भी गिरफ्तार कर लिए गए उनके निचले पायदान के नेता सभा स्थल छोड़कर भाग गए और अपने अपने क्षेत्र में जाकर आंदोलन को सक्रिय करने लगे नेताओं की गिरफ्तारी की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई जनता सड़क पर आ गई पूरे देश में तूफान मच गया सरकारी कर्मचारी भी जनता के साथ आ गए उस समय सभी नौजवान स्त्री पुरुष अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा लगा रहे थे सरकारी वस्त्रों की होली जलाई गई लोगों ने सरकारी कार्यालय थाना पर अपना कब्जा जमा लिया अंग्रेजों ने जनक्रांति को बंदूक की गोलियों से दबाने का काम किया और क्रांति की आग देवरिया जनपद के बसंतपुर धूसी क्षेत्र में भी पहुंची और पूरे क्षेत्र को अपने आगोश में ले लिया 14 अगस्त को बसंतपुर धूसी कॉलेज से क्रांतिकारियों का एक जत्था तिरंगा झंडा लिए ब्रिटिश हुकूमत मुर्दाबाद अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा लगाते हुए देवरिया मुख्यालय के तरफ बड़ा इस टोली का नेतृत्व बसंतपुर धूसी के प्रधानाध्यापक यमुना राव कर रहे थे इंकलाब जिंदाबाद के नारे से आकाश गूंज रहा था पैदल मार्च करते हुए यह टोली देवरिया कचहरी में जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय पर पहुंच गई इस टोली के साथ देवरिया नगर के आसपास के लोग भी आ गए हजारों की तादात थी जिला अधिकारी के कार्यालय पर लगे यूनियन जैक को उतारकर तिरंगा फहराना था अभी लोग सोच विचार ही कर रहे थे की 13 वर्ष का क्रांतिकारी बालक तिरंगा लेकर आगे बढ़ गया और झन्डा फहराने के लिए अन्य साथियों के मदद से ऊपर छत पर चढ़ गया तब तक अंग्रेजी फौज के साथ ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ठाकुर उमराव सिंह वहां पहुंच गया और लाठी चार्ज करा दिया भगदड़ मच गई किंतु रामचंद्र कहां भागने वाला था जिसके अंदर देश आजाद कराने का जज्बा था मजिस्ट्रेट ने रामचंद्र को बच्चा समझकर नीचे उतरने को कहा और गोली मार देने की धमकी दी किंतु रामचंद्र विद्यार्थी ने झंडा फहरा दिया ठाकुर उमराव सिंह अपने को रोक ना सका और गोली चलाने का आदेश दे दिया बस क्या था विद्यार्थी रामचंद्र का सीना अंग्रेजों की गोलियों से छलनी हो गया और वह बालक धड़ाम से नीचे गिर गया वह खून से लथपथ था उसके साथियों ने उसे लच्छीराम पोखरा पर लाया जहां उन्होंने अंतिम सांस ली और उनके मृत शरीर को तिरंगे में लपेटकर हजारों की संख्या में दाह संस्कार किया गया 1949 में प्रधानमंत्री नेहरू नौतन हथियागढ़ आए और उनके परिवार वालों से मिले तथा शहीद के प्रतीक के तौर पर उन्होंने एक चांदी की थाली और 1 गिलास परिवार वालों को दी आजादी के बाद भी सरकार ने शहीद को नजरअंदाज किया और आज तक उनकी एक आदम कद मूर्ति भी नहीं लगा सकी।

Updated by:- Chhavi Srivastava
Report by:- Himmat Singh

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