कोरोना की चपेट में आ रहे गांव के गांव, सरकार लगा रही है बाहरी लोगों की एंट्री पर बैन-

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गांव के लोगों के संक्रमित होने की गति और मौतें देखकर प्रशासन हरकत में आया है. गांव के लोगों की सैंपलिंग की जा रही है और वैक्सीनेशन तेज कर दिया गया

कोरोनावायरस का कहर बरपा हुआ है. इस बीच गांवों की बहुत चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही हैं, जो इस समय हमारी कोरोना से लड़ाई की फिक्र बढ़ा रही है. गांव के गांव कोरोना की चपेट में आ रहे हैं और बुजुर्ग से लेकर युवा तक हर वर्ग के लोग काल के गाल में समा रहे हैं. इस गंभीर हालात को आप इसी से समझ सकते हैं कि उत्तर प्रदेश प्रशासन ने मेरठ के पास परवाना गांव को सील कर दिया है और गांव में किसी बाहरी की एंट्री पर बैन लगा दी है. वजह ये है कि पिछले 45 दिनों में इस गांव में 28 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है, इनमें बुजुर्ग भी हैं और युवा भी हैं. इस गांव में 5 मई को 160 लोगों के सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 41 लोग कोरोना पॉजिटिव निकले थे.

ये हाल सिर्फ उत्तर प्रदेश का नहीं बल्कि देश के एक बड़े हिस्से का है. गांव वालों के मुताबिक, लोग बीमार पड़ रहे हैं और अचानक ही सांसें बंद हो जा रही हैं. शायद ये ऑक्सीजन की कमी भी हो सकती है, लेकिन इलाज के अभाव में अधिकतर मामलों में मौतों की वजह तक नहीं पता चल पा रही है. हमने देश के कई हिस्सों से गांवों का हाल जानने की कोशिश की.

उत्तराखंड में कुंभ का महापर्व तो बीत गया, लेकिन इसके बाद कोरोना फैल रहा. पहाड़ को डराने लगा हैं. उत्तरकाशी के भटवाड़ी ब्लॉक के दो गांवों में 75 कोरोना पोजिटिव पाए गए हैं, जिसके बाद दोनों गांवों को सील कर दिया गया है. पंजाब में करोना ने शहरों के बाद गांवों का रुख कर लिया है और गांव के गांव को चपेट में लेना शुरू कर दिया है, लेकिन हालात इस कदर बिगड़ेंगे. ये कोई सोच भी नहीं सकता था. ये पंजाब के संगरूर का गांव तकीपुर है, जहां देखते ही देखते कोराना का संक्रमण फैला और जब एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई तो हर किसी के होश उड़ गए. गांव के पूर्व सरपंच उनके दो बेटों और एक बेटी की मौत के बाद पूरा गांव सदमे में है. गांव की गलियां सूनी हैं और रौनक गायब है.

लोगों में डर और शोक का माहौल

तरलोक सिंह गांव के पूर्व सरपंच थे और उनका हंसता खेलता परिवार था और उनके गांव में भी बहुत अच्छे संबंध थे और वह हर किसी के दुख सुख में साथ खड़े होते थे और उनकी हुई अचानक मौत के कारण पूरे गांव में डर का माहौल है और पूरे गांव में लोग दूरी बनाकर और मास्क पहनकर रहने लगे हैं. पूर्व सरपंच का परिवार बिल्कुल ठीक-ठाक था अभी वो अपनी गेहूं की फसल को संभाल कर हटे थे और बिल्कुल ठीक-ठाक थे. उनके जाने की खबर ने हमें बहुत ही दुखी कर दिया है उन्होंने कहा कि अब गांव में सभी लोग वैक्सीन लगवा रहे हैं और लोगों में डर और शोक का माहौल है.

गांव के लोगों के संक्रमित होने की गति और मौतें देखकर प्रशासन हरकत में आया है. गांव के लोगों की सैंपलिंग की जा रही है और वैक्सीनेशन तेज कर दिया गया है. कोरोना ना तो शहर देखता है, ना गांव, ना अमीर देखता है ना गरीब और ना पुजारी देखता है, ना अपराधी, दंतेवाड़ा के जंगलों में छिपे नक्सलियों में कोरोना का कहर टूटने की खबरें आ रही हैं. बताया जा रहा है कि इस वक्त दक्षिण बस्तर में कोरोना से हालात भयावह हो चले हैं और यहां पर 200 से ज्यादा छोटे और बड़े कैडर के नक्सली कोरोना से ग्रसित हैं. खबर आ रही है कि बड़ी संख्या में नक्सली फूड प्वायजनिंग और कोरोना संक्रमण से मारे जा रहे हैं.

सरपंच ने कोरोना खत्म होने के लिए बाकायदा जुलूस निकाला

राजस्थान के झालावाड़ में जो कुछ हुआ. वो आ बैल मुझे मार से कम नहीं. यहां के सरपंच ने कोरोना खत्म होने के लिए बाकायदा जुलूस निकाल दिया, जिसमें घास भैरू की सवारी की गई. इसमें ना तो गाइडलाइन का पालन किया गया, ना सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा जाने लगा. आखिर कोरोना ने इस भीड़ में अपना काम कर दिया. लोग ताबड़तोड़ कोरोना संक्रमित होने लगे हैं. लोग घरों मे कैद हैं और हालत ये है कि बिना जांच के जैसे-तैसे अपना इलाज करा रहे हैं. कोविड-19 की दूसरी लहर से वैसे तो पूरा देश प्रभावित है, लेकिन उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में तो दूसरी लहर में लोग बेहाल हो गए हैं. लगातार मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. लोगों में दहशत का माहौल है, खासकर युवाओं में कोरोना के लक्षण देखने को मिल रहे हैं और असमय ही लोग काल के गाल में समाते चले जा रहे हैं.

बिहार में लगातार सरकारी आग्रह के बावजूद लोग शादी समारोहों में कोरोना गाइडलाइन का मखौल उड़ा रहे है, लेकिन दरभंगा के एक परिवार को शादी समारोह का आयोजन करने की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी. इस परिवार में 16 अप्रैल को शादी समारोह आयोजित किया गया, जो पूरे परिवार पर कहर बनकर टूटा है. शादी में शामिल चार लोगों की अभी तक मौत हो चुकी है, जबकि कई गंभीर रूप से बीमार हैं. गांवों के हालात बता रहे हैं कि कोरोना को जिसने भी हलके में लिया उसी को वायरस ने डंसा, लेकिन इस तकलीफ को सरकारी इंतजाम और भी बढ़ा रहे हैं. गांव के गांव कोरोना की चपेट में हैं और दवा तो छोड़िए पीड़ितों को दवा देने के लिए डॉक्टर तक मयस्सर नहीं हो रहे.

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